मगर उन नाज़ुक मुस्कानों ने सब दर्द छुपा रखा है…
छाव ठंडी ही दूंगा, बेशक पत्तो में कड़वाहट हो गई…!
शहर ज़ालिमों का है साहब, जरा संभल कर चलना,
सुना है कोई है नही तुम्हारे पास मन बहलाने को
झूठी दुनिया और झूठे लोगों के बीच निभ नहीं पाता।
लड़कों की हँसी भी अक्सर आंसुओं में बदलती है।
हर शाम ढल जाती है… बस उसके कदमों की आहट बची रह जाती है।
ये जो तुम मुझे छोड़ने की बातें करते हो,
फिर सब वैसा ही होगा, जैसी ये ज़मीं होगी।
हम हँसते भी हैं तो लोग दर्द पहचान नहीं पाते।”
अरे इतनी नफरत है उसे मुझसे की मैं मर भी जाऊं,
दर्द जब बढ़ जाता है तो चेहरे भी बदल जाते हैं।
भरोसा ऐसे ही नही टूटा मेरा मैने देखा है,
ज़ख्म पुराने हुए कोई तो नया ज़ख्म दे Sad Shayari in Hindi जाओ